साजा दो घर को गुलशन सा अवध में राम आए हैं
सजा दो घर को गुलशन सा,अवध में राम आए हैं,अवध मे राम आए है,मेरे सरकार आए हैं,लगे कुटिया भी दुल्हन सी,लगे कुटिया भी दुल्हन सी,अवध मे राम आए हैं,सजा दो घर को गुलशन सा,अवध मे राम आएं हैं ॥ पखारों इनके चरणों को,बहा कर प्रेम की गंगा,बहा कर प्रेम की गंगा,बिछा दो अपनी पलकों को,अवध […]
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