किस्मत संवर गयी है तेरी शरण में आकर

किस्मत संवर गयी है,
तेरी शरण में आकर,
जीने लगे हम भी,
दुनिया में सर उठाकर,
किस्मत संवर गई है,
तेरी शरण में आकर ।।

घुट घुट के अपना जीवन,
यूँ ही बिता रहे थे,
अपनी दशा पे मोहन,
खुद ही लजा रहे थे,
अरमान सारे दिल के,
रखते थे हम दबाकर,
किस्मत संवर गई है,
तेरी शरण में आकर ।।

गैरो की क्या कहे हम
अपनों ने भी ना छोड़ा
कानों के पत्थरो से
शीशे के दिल को तोड़ा
इस दिल के टुकड़े लाए
दर पे तेरे बचाकर
किस्मत संवर गई है
तेरी शरण में आकर।।

ना जाने कब तुम्हारी
हम पर पड़ी नजर है
दर पे बुलाया हमको
‘सोनू’ तेरी मेहर है
करुणा लुटाई हम पे
अपने गले लगा कर
किस्मत संवर गई है
तेरी शरण में आकर।।

किस्मत संवर गयी है,
तेरी शरण में आकर,
जीने लगे हम भी,
दुनिया में सर उठाकर,
किस्मत संवर गई है,
तेरी शरण में आकर ।।

स्वर – संजय मित्तल जी

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *