तुम राधा रमण हो मेरे मैं दास हूं तेरा कब घर मेरे तुम आओ जहां लगता है तेरा पेहरा
दोहा – भक्तआधीनं, दीनदयालं, राधारमणं हरे हरे ॥ भक्तवत्सलं रसिकनरेशं, राधारमणं हरे हरे ।। ( तर्ज – तुम जो चले गये तो होगी बड़ी ख़राबी ) तुम राधा रमण हो मेरे मैं दास हूं तेराकब घर मेरे तुम आओ जहां लगता है तेरा पेहरा दुनिया से हार कर में तेरी शरण […]
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