कृष्ण भजन

देखु सखि, द्वै सावन सँग भाय

देखु सखि, द्वै सावन सँग भाय।सावन महँ जनु तनु धरि सावन, रस बरसावन आय।इत सावन घनश्याम उतै जनु, तनु घनश्याम जनाय।इत सावन दामिनि दमकनि उत, पीत – वसन फहराय।इत सावन नभ इंद्र धनुष उत, मणिगण मुकुट लखाय।इत सावन बरसावत जल उत, आनँद – जल बरसाया।इत सावन तृण हरित अवनि उत, काछनि हरित सुहाय।इत सावन दादुर […]

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मैया! मैं तो मोहिनि-रूप बनैहौं

मैया! मैं तो मोहिनि-रूप बनैहौं।घघरा चुन्नटदार पहिरिहौं, चुनरी शीश धरैहौं।बेंदी भाल लाल लगवैहौं, सेंदुर माँग भरैहौं।वेणी गूँथि पहिरि नथ बेसर, सुरमा सुघर लगैहौं।गर दुलरी, लर हार मोतियन, उर कंचुकी कसैहौं।कर करपत्र चुरी कंकण-मणि, मेहँदी लाल रचैहौं।घूँघट को पट घनो काढ़िहौं, लाजन लाज लजैहौं।नाँव साँवरी सखी धेरैहौं, गति हंसहुँ सकुचैहौं।कालि छली चंद्रावलि अलि मोहिं, आजु छलन

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ढाँपि मुख कामरि रूठे लाल।

ढाँपि मुख कामरि रूठे लाल।उठहु लाल बेला गोचारण, द्वार टेरि रहे ग्वाल।कैसेहुँ उठत न, उठत, न बोलत, रिस भौंहन बल भाल।‘बात कही किन कहा?’ मातु कह, उठि बोले ततकाल।‘सुनु मैया ! मोते कह भैया’, इमि कहि रुदत गुपाल।बिनु पितु मातु आपु कह मो कहँ, हँसत ग्वाल दै ताल।बाबा तोहिं परो पायो कहुँ, कहँ लौं कहौं

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धरो मन, भानुलली को ध्यान

धरो मन, भानुलली को ध्यान।जाको ध्यान धरत निशिवासर,सुंदर श्याम सुजान।कनक मुकुट सिर चारु चंद्रिका,तापर लर मुक्तान।चूनरि जरिन किनार गौर तनु,नीलांबर परिधान।श्रुति ताटंक गुंथी वर वेणी,लजवति भौंह कमान।नासा भल मुक्ताहल सोहति,मन मोहति मुसकान।पग पायल गति अति अभिरामिनि,लखि मराल सकुचान ।पाय ‘कृपालु’ सरस अस स्वामिनि,चरन न कस लपटान॥

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हरे राम हरे राम, हरे कृष्णा हरे कृष्णा

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे,हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे.. रामा, रामा रामा हरे… हरेहरे कृष्णा हरे.. कृष्णा, कृष्णा कृष्ण हरे… हरेहरे  राम हरे राम, राम राम हरे हरे.. हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे,हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे..

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श्री राधा रानी जी आरती श्री जै जै हो श्यामा जू मैं शरण तिहारी, सेवा कुंज वारी, श्री हरिवंश दुलारी श्री लोचन आरती जाऊँ बलिहारी।

श्री राधा रानी आरती श्री जै जै हो श्यामा जू मैं शरण तिहारी,सेवा कुंज वारी, श्री हरिवंश दुलारीश्री लोचन आरती जाऊँ बलिहारी। पाट पीतांबर ओढ नील सारी,सीस के सिंदूर जाऊँ बलिहारी।पाट पीतांबर ओढ नील सारी,माँग के सिंदूर जाऊँ बलिहारी।। रतन सिंहासन बैठी श्री राधे,आरती करें हम पिय संग जोरी।फूल सिंहासन बैठी श्री राधे,आरती करें हम

श्री राधा रानी जी आरती श्री जै जै हो श्यामा जू मैं शरण तिहारी, सेवा कुंज वारी, श्री हरिवंश दुलारी श्री लोचन आरती जाऊँ बलिहारी। Read More »

जो कहानी राम की है वो कहानी श्याम की

जो कहानी राम की है वो कहानी श्याम कीराम के संग जानकी है राधा रानी श्याम की राम और लक्ष्मण की जोड़ी कृष्ण और बलराम कीयह अयोध्या राम की है मथुरा नगरी श्याम की राम की कौशल्या माता देवकी गोपाल कीराम है मेरे धनुषधारी मुरली है मेरे श्याम की शबरी के बेर को राम खाये

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महल राधिका का बुहारा करेंगे

महल राधिका का,बुहारा करेंगे                उन्हें आते जाते,निहारा करेंगे                    महल राधिका….       चरण सेवा जीवन का,उदेश होगा समय  गहवर वन में,गुज़रा करेंगे        उन्हें आते जाते,निहारा करेंगे      महल राधिका….      ढुंढेंगे उनको हम,कुंजों

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राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र

मुनीन्द्र वृन्द वन्दिते त्रिलोक शोक हारिणिप्रसन्न-वक्त्र-पण्कजे निकुञ्ज-भू-विलासिनिव्रजेन्द्र–भानु–नन्दिनि व्रजेन्द्र–सूनु–संगतेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥१॥अशोक–वृक्ष–वल्लरी वितान–मण्डप–स्थितेप्रवालबाल–पल्लव प्रभारुणांघ्रि–कोमले ।वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालयेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥२॥ अनङ्ग-रण्ग मङ्गल-प्रसङ्ग-भङ्गुर-भ्रुवांसविभ्रमं ससम्भ्रमं दृगन्त–बाणपातनैः ।निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दनेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥३॥ तडित्–सुवर्ण–चम्पक –प्रदीप्त–गौर–विग्रहेमुख–प्रभा–परास्त–कोटि–शारदेन्दुमण्डले ।विचित्र-चित्र सञ्चरच्चकोर-शाव-लोचनेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥४॥ मदोन्मदाति–यौवने प्रमोद–मान–मण्डितेप्रियानुराग–रञ्जिते कला–विलास – पण्डिते ।अनन्यधन्य–कुञ्जराज्य–कामकेलि–कोविदेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥५॥ अशेष–हावभाव–धीरहीरहार–भूषितेप्रभूतशातकुम्भ–कुम्भकुम्भि–कुम्भसुस्तनि ।प्रशस्तमन्द–हास्यचूर्ण पूर्णसौख्य –सागरेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्

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मिलता हैं हमको सुख केवल श्याम तुम्हारे भजनों में

मिलता हैं हमको सुख केवल ,श्याम तुम्हारे भजनों में ,ये विनती हैं , हम भक्तों की ,रहे ध्यान तुम्हारे भजनों में , सारे जग को हमने छोड़ा हैं ,बस तुमसे रिश्ता जोड़ा हैं ,अब जुड़ा रहे बंधन ये सदा,रहे ध्यान तुम्हारे भजनों में , मिलता हैं हमको सुख केवल ,श्याम तुम्हारे भजनों में ,ये विनती

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