संजय मित्तल

ओ सांवरे सारे सहारे छूटे जाये मेरा सहारा है तू

ओ सांवरे सारे सहारे छूटे जाये,रूठ जाये लोग हमसे क्या हुआ,मेरा सहारा है तू,मेरा सहारा है तू,मेरा सहारा है तू, ओ साँवरे।। सबके पास तो काम है श्याम,पास तेरे कोई काम नहीं,पर जब हारे कोई भगत,आता तुझे आराम नहीं,रुक नहीं पाता दौड़ा आता,हाथ लेता अपने भक्तों का थाम,मेरा सहारा है तू,मेरा सहारा है तू,मेरा सहारा […]

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जब से खाटू आया खाटू वाला बना मेरा

जब से खाटू आयाखाटू वाला बना मेराअपने ना बने अपनेअपने ना बने अपनेइसने पकड़ा हाथ मेराजब से खाटू आयाखाटू वाला बना मेरा। तर्ज – गुरुदेव दया करके। मुफ़लिस में जो सोचा था,ये ना मिल पाएगा कभी,मैं सोच के भूल गया,इसने लिख ही लिया था तभी,मेरी सोच बदल करके,सपना किया पूरा मेरा,जब से खाटु आया,खाटू वाला

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रोये जो श्याम का प्रेमी उसे श्याम ही धीर बँधाए

रोये जो श्याम का प्रेमी,उसे श्याम ही धीर बँधाए,जिसे सांवरिया ही रुलाए,उसे कौन कौन हंसाए,उसे कौन कौन हंसाए।। तर्ज – चिंगारी कोई भड़के दौलत शोहरत मत मांगोबस मांगो साथ प्रभु काकैसी भी कोई घड़ी होहो सर पे हाथ प्रभु काजो प्रेमी राह से भटकेप्रभु मंजिल तक पहुंचाएजो प्रभु से हाथ छुड़ाएउसे कौन चलाएरोए जो श्याम

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मेरे ओ सांवरे तूने क्या क्या नहीं किया

मेरे ओ सांवरे,तूने क्या क्या नहीं किया,जब लगा मैं गिरा,थामा तूने लिया,फिर दोबारा ना गिरने दिया,मेरे ओ सांवरे,तूने क्या क्या नहीं किया।। तर्ज – घुंघरू की तरह। अपनों की कहूं,क्या मैं तुझसे प्रभु,कौन अपना है ये,जानता है भी तू,डाल मुझ पे नज़र,तू मेरा हमसफर,है ये जग को बता दिया,मेरे ओ साँवरे,तूने क्या क्या नहीं किया।।

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म्हाने हिचक्या आवे जी श्याम

अरज लगावे जी,सांवरिया थासु अरज लगावे जी,म्हारी आंख्या सु नीर बहे,म्हाने हिचक्या आवे जी,याद सतावे जी,सांवरिया थारी याद सतावे जी,म्हारी आंख्या सु नीर बहे,म्हने हिचक्या आवे जी।। तर्ज – हुस्त्र पहाड़ों का। कागलियो तो मुंडेर पे बोले,आजा रे कन्हैया म्हारो, जिवडो यो डोले,प्रीत या म्हारी काहे को तोले,अरज लगावे जी,सांवरिया थासु अरज लगावे जी,म्हारी आंख्या

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सोचा नहीं जो ख्वाब में उतना हमें मिला

सोचा नहीं जो ख्वाब में,उतना हमें मिला,टूटे ना तेरी रहमतों का,श्याम सिलसिला,सोचा नही था ख्वाब में।। तर्ज – लग जा गले। एक दिन मेरी ये जिंदगी,तेरे दर पे मुड़ गई,टूटी हुई थी ख्वाहिशे,एक पल में जुड़ गई,पहली ही हाजरी का,इतना दिया सिला,टूटे ना तेरी रहमतों का,श्याम सिलसिला,सोचा नही जो ख्वाब में।। सेवा में जबसे आपने,मुझको

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श्याम सपनो में आए मुझे धीर बंधाए

श्याम सपनों में आए,मुझे धीर बंधाए,मुझे हरपल ये समझाए,तू क्यों घबराता है,क्यों जी को जलाता है।। तर्ज – मुझे नींद ना आए। तेरा मेरा नाता इतना गहरा है,हरदम तेरे ऊपर मेरा पहरा है,भाव भजन तू रोज कर,मेरे भरोसे मौज कर,हर पल मुस्काए,दुःख मेरे मिटाए,मुझे हरपल ये समझाए,तू क्यों घबराता है,क्यों जी को जलाता है।। दुनियां

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श्याम तेरी लगन जो लगी तो अगन भी लगे बर्फ सी

श्याम तेरी लगन जो लगी,तो अगन भी लगे बर्फ सी,तेरी परछाई हम पे बिछी,जो मिठाई पे हो बर्क सी,श्याम तेरी लगन जो लगी,तो अगन भी लगे बर्फ सी।। तर्ज – जिंदगी प्यार का गीत है। सब जगह से निकाले हुए,तेरी महफ़िल में शामिल हुए,सच कहे ऐसी किरपा हुई,अब जमाने के काबिल हुए,है मिजाजी ये मौसम

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मैं दुखिया नीर बहाता तू बैठा मौज उड़ाता

मैं दुखिया नीर बहाता,तू बैठा मौज उड़ाता,कुछ तो सोच विचार रहम कर,कुछ तो सोच विचार रहम कर,दीनानाथ कुहाता कुहाता,मैं दुखिया नीर बहाता,तू बैठा मौज उड़ाता।। ध्रुव प्रहलाद सुदामा जैसी,धीर कहाँ से लाऊँ,प्राणी हूँ कलिकाल का भगवन,हर पल धीर गवाऊँ,जैसा भी पर सेवक तेरा,जैसा भी पर सेवक तेरा,काहे इसे लजाता लजाता,मैं दुखिया नीर बहाता,तू बैठा मौज

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तड़पता है तेरा ये दास संभालो

चले आओ,तड़पता है तेरा ये दास संभालो,मिलन की आस ना टूटे संभालो।। ये जीवन भी है थोड़ा,ये सांसे भी है थोड़ी,है रस्ता सीधा दर का,क्यों मेरी राहे मोड़ी,मुझे तेरी डगर पे श्याम चला लो,मिलन की आस ना टूटे संभालो,तड़पता हैं तेरा ये दास संभालो।। मेरे दिल में तुम्ही हो,मेरी धड़कन तुम्ही हो,ना भूलो श्याम मुझको,मेरा

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