संजय मित्तल

खाटू बुला रहा है किरपा नहीं तो क्या है

खाटू बुला रहा है,किरपा नहीं तो क्या है,अब तक निभा रहा है,अब तक निभा रहा है,किरपा नहीं तो क्या है,खाटू बुला रहा है,किरपा नहीं तो क्या है |bd| तर्ज: दुनिया ने दिल दुखाय कोई साथ दे या ना दे,तूने दिया सहारा,महसूस होता सिर पे,बस हाथ है तुम्हारा,अब भी फिरा रहा है,किरपा नहीं तो क्या है,खाटु […]

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थारे हाथा है म्हारी या बाबा जीवन डोर

थारे हाथा है म्हारी या,बाबा जीवन डोर,टाबरिया गलती करसी,टाबरिया गलती करसी,करियो ना गौर,थारे हाथां है म्हारी या,बाबा जीवन डोर |bd| तर्ज: किस्मत वालों को मायत आगे टाबर इतरावे,मायत सामे जियो ना घबरावे,म्हाका माँ बाप थे ही हो,म्हाका माँ बाप थे ही हो,कोई ना और,थारे हाथां है म्हारी या,बाबा जीवन डोर |bd| गलती करणो टाबर को

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प्रभु मुझको मेरा वो बचपन लौटा दो

प्रभु मुझको मेरा, वो बचपन लौटा दो,ना छल ना कपट हो, मेरी जिंदगी में,प्रभु फिर से निर्मल, मेरा मन बना दो,प्रभु मुझ को मेरा, वो बचपन लौटा दो। bd। तर्ज – वो जब याद आए। नैना निश्छल मेरे,मन में हो भोलापन,तोतली हो जुबां,गाऊँ जब भी भजन,वही मीठी बातों से,तुझको रिझाऊँ,मेरे लाड में तुम भी,सब कुछ

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तेरी दया से चलता गुजारा बाबा हमारा

तेरी दया से, चलता गुजारा बाबा हमारा, विपदा में तू ही, बना है सहारा बाबा हमारा।। सोते या उठते मुख से हमारे, तेरा नाम निकले, बदले तो बदले चाहे जमाना, पर तू ना बदले, भंवर से हमेशा, कश्ती को बाबा तूने निकाला, तेरी दया सें।। हमने किया है खुद को दयालु, तेरे हवाले, चिंता करे

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श्याम के दर पे जाकर के ग्यारस अर्जी लगा करके

श्याम के दर पे जाकर के,ग्यारस अर्जी लगा करके, मैंने जो मांगा मिल गया, किस्मत का ताला खुल गया।। तर्ज – धीरे धीरे बोल कोई। बारह महीने मौज उड़ाता हूँ, श्याम धणी का दिया ही खाता हूँ, इनसे बड़ा ना कोई है दातार, सारे जग को यही बताता हूँ, यही साथी है यही माझी है,

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ये भीड़ नहीं बाबा कुछ लेने आयी है

ये भीड़ नहीं बाबा, कुछ लेने आयी है, तेरी नजर रहे हम पर, यही कहने आयी है।। तर्ज – दिलदार कन्हैया ने। हम दीनों को बाबा, बस आस यही रहती, मन्जर चाहे जैसा हो, पर डूबे ना ये कश्ती, छोटी-छोटी बाते, बतलाने आयी है, तेरी नजर रहे हम पर, यही कहने आयी है।। जो तुझको

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श्याम तुम्हारा प्यार मिला है और भला क्या मांगू

श्याम तुम्हारा प्यार मिला है, और भला क्या मांगू, ये प्यारा दरबार मिला है, और भला क्या मांगू ।bd। तर्ज – कौन सुनेगा किसको सुनाएं। मुझसे ये दरबार ना छूटे, बस ये मेरी विनती है, दुनिया रूठे तू ना रूठे, बस ये मेरी विनती है, स्वर्ग सा ये, संसार मिला है, और भला क्या मांगू

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महफिल नहीं है बावरे कीर्तन है बाबा श्याम का

महफिल नहीं है बावरे, कीर्तन है बाबा श्याम का, बनके दीवाना देख ले, तू भी प्रभु के नाम का ।। तर्ज़ – खाटू बुला रहा है। कीर्तन करो तो ऐसे, सुधबुध ही भूल जाओ, भक्ति का है ये सागर, बस इसमे डूब जाओ, आँखों में हो नजारा, बस तेरे खाटू धाम का, मेहफिल नही है

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तुम राजा हो जग के श्याम हम प्रजा तेरी

तुम राजा हो जग के श्याम, हम प्रजा तेरी,आनंद है सुबहो शाम, ये कृपा तेरी।। तर्ज- लो आ गया अब तो श्याम । इंसानों में ओ बाबा, इंसानियत ना पाई, दौलत के दिखावे में, दिल की गरीबी छाई,दुखड़ो से भरी आँखें, पोंछीं है तुमने मेरी,तुम राजा हों जग के श्याम,हम प्रजा तेरी,आनंद है सुबहो शाम,

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हाथों का ताज सिर पे सजा दो कन्हैया

तर्ज- बहुत हो गया अब । हाथों का ताज सिर पे, सजा दो कन्हैया,नज़र अपनी मुझको,नज़र अपनी मुझको,लगा दो कन्हैया,हाथो का ताज सर पे,सजा दो कन्हैया Ibdi कांच जो टूटे तो जुड़ नहीं पाता, सुनता हूँ फूटी किस्मत, तू ही बनाता किस्मत मेरी भी, बना दो कन्हैया, हाथो का ताज सर पे,सजा दो कन्हैया Ibdi

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